दिल्ली की ये इमारत मानी जाती है मुगल काल की सबसे आखिरी, आप भी शहर में रहते हुए कर लें इसका दीदार

दिल्ली की ये इमारत मानी जाती है मुगल काल की सबसे आखिरी, आप भी शहर में रहते हुए कर लें इसका दीदार – भारत में मुगलकाल के दौरान ताज महल, लाल किला और दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी कई इमारतें बनाई गई थी। पर क्या आप जानते हैं कि मुगल दौर की आखिरी इमारत कौन सी थी आपको बता दें, ये इमारत दिल्ली में ही स्थित है। मुगल जमाने की आखिरी इमारत महरौली इलाके में हाजी बख्तियार काकी की दरगाह के पास मौजूद है। इमारत का नाम जफर महल है। संरचना की दीवारों पर कई सुंदर नक्काशियां की गई हैं। चलिए आपको इस इमारत के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।

मुगल काल खत्म होने पर बनाई गई थी इमारत

जफर महल को देखकर ऐसा लगता है कि इसे तब बनाया होगा जब मुगलकाल खत्म होने की कगार पर था। संरचना कीसुंदरता और उसकी भव्यता की झलक साफ दिखाई देती है। कुछ लोग तो इसे जीनत महल या लाल महल भी बुलाते हैं। आपको बता दें, जीनत महल मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की पत्नी थीं। उनका बहादुर शाह जफर से निकाह साल 1840 में हुआ था, इसके बाद ही इस इमारत को बनाया गया होगा।

महल की खासियत

दिल्ली राजधानी में कई इमारत हैं, जिनमें से कुछ को तो भुला दिया गया और कुछ पर किसी का आजतक ध्यान नहीं गया है। उनमें से एक जफर महल भी है, जिसे अंतिम मुगल स्मारक माना जाता है। यह एक तीन मंजिला संरचना है, जिसे लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। बाद में इसमें मुगल शैली में बना एक बड़ा छज्जा भी है, जो इस इमारत की प्रमुख विशेषता भी है। भारतीय, मुगल और यूरोपीय शैली का मिश्रण महल को आकर्षक बनाता है।

महल का एक और आकर्षण

इस महल को लाल महल के नाम से जाना जाता था। लेकिन बाद में ये लोकप्रिय रूप से जफर महल के रूप में जाना जाने लगा, क्योंकि 1848 में बहादुर शाह ने महल के उत्तरी हिस्से में एक ऊंचा प्रवेश द्वार बनवाया था। यह इतना ऊंचा था कि इसका इस्तेमाल हाथियों को भी अंदर लाया और बाहर ले जाया जा सके।

जफर महल में अंग्रेजों का कब्जा

ऐसा कहा जाता है कि 1857 के दौरान ब्रिटिश सैनिकों ने इस इमारत पर अपना कब्जा जमा लिया था और जंग में मारी गई सेना की लाशों को इसी हवेली में मौजूद एक कुएं में फेंक दिया था। कई लाशों को तहखाने में डाल दिया गया था। सम्राट जफर महल की परिधि में ही दफन होना चाहते थे, क्योंकि उनके सभी वंशज और मुगल साम्राज्य के सम्राटों को महल के कब्रिस्तान की परिधि में सम्मानपूर्वक दफनाया गया था। हालांकि, जफर को अंग्रेजों ने जेल में डालकर उन्हें रंगून भेज दिया गया था।

कैसे पहुंचें जफर महल 

1. कहां – जफर महल – महरौली ग्राम बाजार, 818, कालका दास मार्ग, बड़ीवाला कुआ, महरौली
2. एंट्री – फ्री
3. समय – सुबह 10 बजे – शाम 6 बजे

Conclusion:- दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने दिल्ली की ये इमारत मानी जाती है मुगल काल की सबसे आखिरी, आप भी शहर में रहते हुए कर लें इसका दीदार के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इसलिए हम उम्मीद करते हैं, कि आपको आज का यह आर्टिकल आवश्यक पसंद आया होगा, और आज के इस आर्टिकल से आपको अवश्य कुछ मदद मिली होगी। इस आर्टिकल के बारे में आपकी कोई भी राय है, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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