माता दुर्गा के 5 रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान

माता दुर्गा के 5 रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान

माता दुर्गा के 5 रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान – दुर्गा माता कौन है, माता दुर्गा के पति कौन है, माँ दुर्गा के टोटके, माँ दुर्गा को बुलाने का मंत्र, दुर्गा और महिषासुर की कहानी, माँ दुर्गा के 108 नाम, क्या पार्वती ही दुर्गा है, माँ दुर्गा के 1008 नाम,

काली – पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की चार पत्नियां थीं। जिसमें मां काली भगवान शिव की चौथी पत्नी है। उन्होंने इस पृथ्वी पर भयंकर दानवों का नाश किया था। दिनों तक पूजा अर्चना की जाती है।

माता सती – भगवान शंकर ने सर्वप्रथम दक्ष राजा की पुत्री दक्षायनी से विवाह किया था। और इस दक्षायनी को ही सती कहा जाता है। अपने पति शंकर का अपमान होने के कारण सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में कूदकर अपनी जान दे दी थी। इसके बाद माता सती ने पार्वती के रूप में हिमालयराज के यहां जन्म ली और भगवान शिव की घोर तपस्या की और फिर से उन्होंने शिव को पति के रूप में प्राप्त कर लिया और तभी से वह जगत में पार्वती के रूप में विख्यात हुईं।

माता पार्वती – माता पार्वती शंकर की दूसरी पत्नीं थीं जो पूर्वजन्म में सती थी। माता पार्वती को भी दुर्गा का अवतार माना गया है, लेकिन वे दुर्गा नहीं है। माता पार्वती के श्रीगणेश और कार्तिकेय दो पुत्र माने गए हैं।

देवी दुर्गा – हिरण्याक्ष के वंश में दुर्गमासुर नामक एक महा शक्तिशाली दैत्य उत्पन्न हुआ था। दुर्गमासुर से सभी देवता परेशान हो गए थे। यहां तक कि उसने इंद्र की नगरी अमरावती को भी घेर लिया था। दुर्गमासुर से परेशान होकर देवताओं ने स्वर्ग से भागकर पर्वतों की कंदरा और गुफाओं में शरण ले ली और सहायता के लिए आदि शक्ति अम्बिका की आराधना करने लगे। देवी ने प्रकट होकर दुर्गमासुर सहित उसकी समस्त सेना को नष्ट कर दिया। और तभी से यह देवी दुर्गा कहलाने लगी।

नवदुर्गा: माँ दुर्गा के 9 रूप –
1. शैलपुत्री
2. ब्रह्मचारिणी
3. चन्द्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कंदमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिद्धिदात्री
देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक दैवीय शक्ति को पहचानना ही नवरात्रि मनाना है।असीम आनन्द और हर्षोल्लास के नौ दिनों का उचित समापन बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ होता है। नवरात्रि पर्व की 9 रातें देवी माँ के 9 विभिन्न रूपों को को समर्पित हैं जिसे नवदुर्गा भी कहा जाता है।

क्यों हैं माँ दुर्गा के नौ रूप –
यह भौतिक नहीं, बल्कि लोक से परे आलौकिक रूप है, सूक्ष्म तरह से, सूक्ष्म रूप। इसकी अनुभूति के लिये पहला कदम ध्यान में बैठना है। ध्यान में आप ब्रह्मांड को अनुभव करते हैं। इसीलिये बुद्ध ने कहा है, आप बस देवियों के विषय में बात ही करते हैं, जरा बैठिये और ध्यान करिये। ईश्वर के विषय में न सोचिये। शून्यता में जाईये, अपने भीतर। एक बार आप वहां पहुँच गये, तो अगला कदम वो है, जहां आपको विभिन्न मन्त्र, विभिन्न शक्तियाँ दिखाई देंगी, वो सभी जागृत होंगी।

बौद्ध मत में भी, वे इन सभी देवियों का पूजन करते हैं। इसलिये, यदि आप ध्यान कर रहे हैं, तो सभी यज्ञ, सभी पूजन अधिक प्रभावी हो जायेंगे। नहीं तो उनका इतना प्रभाव नहीं होगा। यह ऐसे ही है, जैसे कि आप नल तो खोलते हैं, परन्तु गिलास कहीं और रखते हैं, नल के नीचे नहीं। पानी तो आता है, पर आपका गिलास खाली ही रह जाता है। या फिर आप अपने गिलास को उलटा पकड़े रहते हैं। 10 मिनट के बाद भी आप इसे हटायेंगे, तो इसमें पानी नहीं होगा। क्योंकि आपने इसे ठीक प्रकार से नहीं पकड़ा है।

सभी पूजन ध्यान के साथ शुरू होते हैं और हजारों वर्षों से इसी विधि का प्रयोग किया जाता है। ऐसा पवित्र आत्मा के सभी विविध तत्वों को जागृत करने के लिये, उनका आह्वाहन करने के लिये किया जाता था। हमारे भीतर एक आत्मा है। उस आत्मा की कई विविधतायें हैं, जिनके कई नाम, कई सूक्ष्म रूप हैं और नवरात्रि इन्हीं सब से जुड़े हैं |

Conclusion:- दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने माता दुर्गा के 5 रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इसलिए हम उम्मीद करते हैं, कि आपको आज का यह आर्टिकल आवश्यक पसंद आया होगा, और आज के इस आर्टिकल से आपको अवश्य कुछ मदद मिली होगी। इस आर्टिकल के बारे में आपकी कोई भी राय है, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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