सीकर का इतिहास

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सीकर का इतिहास

नमस्कार दोस्तों आज हम सीकर जिला का इतिहास, भूगोल, जनसंख्या, क्षेत्रफल, साक्षरता आदि के बारें में जानकारी प्राप्त करेंगे, राजस्थान की पूर्वी सीमा पर स्थित सीकर जिला शेखावटी क्षेत्र के रूप में जाना जाता हैं, वीरभान का बास जिले का प्राचीन नाम है, इसकी स्थापना वीरभान ने की थी, चलिए सीकर की संक्षिप्त हिस्ट्री को जानते हैं,

सीकर का इतिहास क्या है :
सीकर का इतिहास महाभारत काल से माना जाता है कहा जाता है, की एक रहस्यमय मूर्ति की वजह से सीकर जिले का निर्माण हुवा है लेकिन ऐतिहासिक गर्न्थो से मिली जानकारी के अनुसार 1744 में सीकर की स्थापना हुई और फिर 13 राजाओं के शासन करने के बाद सीकर को राजस्थान में विलय कर दिया और सीकर को राजस्थान के अधीन कर दिया।

सीकर का इतिहास भगवान गणेश जी की एक मूर्ति के मिलने के साथ सुरु हुवा था दरअसल वीरभान गांव के पास ( वर्तमान सीकर) कासली नाम की एक रियासत हुवा करती थी कासली के राजा का हिन्दू धर्म मे अटूट विश्वाश था कासली के पास एक संत रहा करते थे, जो भगवान की तपस्या करते थे, ओर दुखी लोगे के कष्ट दूर करते थे कासली के राज की दानवीरता से संत ने गणेश जी की मूर्ति प्रदान की कहा जाता है, की इस मूर्ति के बाद संत ने कासली के राजा को अविजय होने का वरदान दे दिया लेकिन वीरभाव के गाँव के राज माधोसिंह बार बार कासली ओर आक्रमण किया लेकिन वह असफल रहा।

लेकिन माधोसिंह को इस मूर्ति के रहस्य का पता लग गया ओर फिर धोखे से इस गणेश जी की मूर्ति को अपने पास ले आया इसके लिए माधोसिंहने साधु का वेश धारण करके गए इसलिये कासली के राजा समझ नही सके और वो मूर्ति माधोसिंह को दी दिया मूर्ति प्राप्त करने के अगली सुबह कासली पर आक्रमण किया तो इस बार माधोसिंह ने कासली पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया इससे प्रभावित होकर माधोसिंह ने सुभाष चौक में एक मंदिर बनवाया ओर इस मूर्ति की स्थापना करवाई इसके पास ही अनेक मंदिरों का भी निर्मान करवाया ओर रामलीला को ओर बढ़ावा दिया वर्तमान समय मे शेखावटी के सभी लोगो यहां रामायण देखने के लिए आते है इसके बाद माधोसिंह ने वीरभान का गाँव का विस्तार किया और इसके बाद से सीकर धीरे धीरे अपनी संस्कृति, रीति रिवाज, विरासत का निर्माण किया और एक सम्पन जिला बना।

सीकर की भौगोलिक और भौतिक विशेषताएं : भूगोल
सीकर जिला राजस्थान राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है यह उत्तर में झुंझुनू जिले से, उत्तर-पूर्व में चूरू जिले से, दक्षिण-पश्चिम में नागौर जिले से और दक्षिण-पूर्व में जयपुर जिले से घिरा हुआ है यह हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले को इसके उत्तर-पूर्व कोने में भी छूता है इसकी औसत ऊंचाई 427 मीटर (1401 फीट) है।
जिले का क्षेत्रफल 7742.43 वर्ग किमी (2,989.37 वर्ग मीटर) है।

जनसांख्यिकी :
2011 की जनगणना के अनुसार, सीकर जिले की आबादी 26,77, 333 है, जिनमें से पुरुष और महिलाएं क्रमशः 13,74,990 और 13,02,343 हैं सीकर की जनसंख्या लगभग कुवैत या अमेरिकी राज्य नेवादा के देश के बराबर है यह इसे भारत में 150 वें (कुल 640 जिलों में से) की रैंकिंग देता है।

सीकर का इतिहास के बारे में जानकारी :
प्राचीन समय मे सीकर भी अन्य रियासतों की तरह एक देसी रियासत (sikar ka itihas) हुवा करता था राजस्थान में सीकर जिले को विकशित शहरों में गिना जाता है यहां के लोगो के रीति रिवाज ओर संस्कृति को पूरे भारत में मनाया जाता है इसका सबसे बड़ा कारण है, की यह अनेक राजपूत शासकों ने सीकर का बार बार निर्माण करवाया और सीकर की संस्कृति, विरासत को सम्पूर्ण राजस्थान में फैलाया सीकर को शेखावाटी का सबसे विकासशील ओर विकशित जिलों में गिना जाता है यहां के शासकों ने अनेक मंदिरों, गुरुद्वारों, ओर धर्म के उत्थान के कार्य किया है ओर सीकर के इतिहास को इतिहास के पनो में अमर कर दिया, तो आइए जानते है

भारत कि आज़ादी में सीकर जिले का अहम योगदान रहा था भारत के राष्ट्रपति ओर उपरास्त्रपतियो का जन्म भी शिकार जिले में माना जाता है भारत के उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत का जन्म भी राजस्थान में माना जाता है सीकर भारत की आज़ादी से पूर्ण एक देसी रियासत था, यह सैन्य शक्ति से काफी सम्पन था इसलिए भारत की आज़ादी में शिखर का महत्वपूर्ण योगदान था ओर इसी कारण यहां अनेक धर्मो का विकास हुवा जिसकी झलक आज भी देखने को मिलता है जो सीकर के इतिहास को सबसे आकर्षित बनाता है।

सीकर कहा पर स्तिथ है :
सीकर राजस्थान के उत्तर पश्चिम में स्तिथ एक जिला है सीकर जिले के उत्तर में झुंझुनू जिला है और उतर पश्चिम में चुरू जिला स्थित है इसके दक्षिण पश्चिम में नागौर जिले स्तिथ है और पूर्व पश्चिम में जयपुर जिला स्तिथ है यह त्रिकोणीय स्तिथ में बना हुआ है, जो यह सीकर, नीमका थाना, श्रीमाधोपुर, ओर नागौर जिले से जुड़ा हुआ है।

अगर आप सीकर घूमने की योजना बना रहे है, तो जयपुर, चुरू ओर बीकानेर से आप बस के माध्य से आसानी से सीकर पहुच सकते है यहां पर आपको अनेक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल देखने को मिलते है, जिनमे खाटूश्यामजी का मंदिर, जिण माता का मंदिर और हर्षनाथ का मंदिर शामिल है आप भविष्य में जब भो यात्रा करने के लिए जाए, तो खाटूश्याम जी के मंदिर में जरूर जाना चाहिए। खाटूश्याम जी का इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ माना जाता है।

सीकर की स्थापना किसने की :
सीकर जिले की स्थापना 22 अगस्त 1744 को राव दौलतसिंह की थी प्राचीन ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है, की इसका प्राचीन समय मे नाम वीरभाव का बस था सीकर पर 1744 से लेकर 1953 तक कुल 13 राजाओं ने अपना शासन स्थापित किया लेकिन जब भारत आजाद हुवा तो 1954 में सीकर के अंतिम शासक कल्याणसिंह ने सीकर का राजस्थान में विलय कर दिया और सत्ता राज्य सरकार को दे दी लकिन यहां पर हिन्दू शाहक अधिक हुए, इसलिए यहां पर आकर्षित मंदिर, राजस्थनी कला और राजस्थनी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

सीकर का इतिहास महाभारत काल से माना जाता है कहा जाता है, की एक रहस्यमय मूर्ति की वजह से सीकर जिले का निर्माण हुवा है लेकिन ऐतिहासिक गर्न्थो से मिली जानकारी के अनुसार 1744 में सीकर की स्थापना हुई और फिर 13 राजाओं के शासन करने के बाद सीकर को राजस्थान में विलय कर दिया और सीकर को राजस्थान के अधीन कर दिया।

सीकर का इतिहास भगवान गणेश जी की एक मूर्ति के मिलने के साथ सुरु हुवा था दरअसल वीरभान गांव के पास ( वर्तमान सीकर) कासली नाम की एक रियासत हुवा करती थी कासली के राजा का हिन्दू धर्म मे अटूट विश्वाश था कासली के पास एक संत रहा करते थे, जो भगवान की तपस्या करते थे, ओर दुखी लोगे के कष्ट दूर करते थे कासली के राज की दानवीरता से संत ने गणेश जी की मूर्ति प्रदान की कहा जाता है, की इस मूर्ति के बाद संत ने कासली के राजा को अविजय होने का वरदान दे दिया लेकिन वीरभाव के गाँव के राज माधोसिंह बार बार कासली ओर आक्रमण किया लेकिन वह असफल रहा।

लेकिन माधोसिंह को इस मूर्ति के रहस्य का पता लग गया ओर फिर धोखे से इस गणेश जी की मूर्ति को अपने पास ले आया इसके लिए माधोसिंहने साधु का वेश धारण करके गए इसलिये कासली के राजा समझ नही सके और वो मूर्ति माधोसिंह को दी दिया मूर्ति प्राप्त करने के अगली सुबह कासली पर आक्रमण किया तो इस बार माधोसिंह ने कासली पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया। इससे प्रभावित होकर माधोसिंह ने सुभाष चौक में एक मंदिर बनवाया ओर इस मूर्ति की स्थापना करवाई इसके पास ही अनेक मंदिरों का भी निर्मान करवाया ओर रामलीला को ओर बढ़ावा दिया वर्तमान समय मे शेखावटी के सभी लोगो यहां रामायण देखने के लिए आते है इसके बाद माधोसिंह ने वीरभान का गाँव का विस्तार किया और इसके बाद से सीकर धीरे धीरे अपनी संस्कृति, रीति रिवाज, विरासत का निर्माण किया और एक सम्पन जिला बना।

सीकर का राजस्थान राज्य में विलय होना :
सन 1744 से लेकर भारत के आज़ाद होने तक 11 राजाओं ने सीकर पर अपना शासन स्थापित किया और धीरे धीरे सीकर का निर्माण किया इससे सीकर धीरे धीरे काफी बड़ा होता गया ओर जयपुर की एक बड़ी रियासत बनकर उभरा लेकिन जब भारत आज़ाद हुवा तो, भारत में कानून में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करना जरूरी था, इसलिए सभी रियासतों को राज्य में मिलाना जरूरी था।

सीकर का अंतिम शासक कल्याण सिंह हुए इन्होंने सीकर ठिकाना को सीकर की राजधानी बनाया। यह वही सीकर ठिकाना है, जिसकी स्थापना राव दौलतसिंह ने की थी कल्याण सिंह से सन 1922 से लेकर 1963 तक सीकर पर अपना शासन किया लेकिन कल्याण सिंह को सरकार ने सीकर का विलय करने के लिए तैयार किया और फिर सीकर का राजस्थान राज्य में विलय कर लिया

भारत मे आज़ादी दिलाने में सीकर की भूमिका :
जिस समय भारत आजाज़ हुवा था, उस समय सीकर जयपुर के बाद सबसे सम्पन रियासत था 1857 की क्रांति के बाद से सीकर ने आजादी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी आजाद भारत के राष्ट्पति ओर उपराष्ट्रपति का संबंध सीकर से ही है गोविंद नारायण को इंदिरा गांधी ने समानित किया था, उन्होंने देश के आज़ादी से लेकर भारत के निर्माण तक काफी मेहनत की थी, इसलिए हम कह सकते है, की शिकार जिले का आने आप का एक इतिहास रहा है, जिसकी संस्कृति ओर विरासत के चर्चे पूरे भारत मे होते है।

सीकर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल :
सीकर में हिन्दू राजाओं ने काफी शासन किया था इसलिए आज सीकर में अनेक धार्मिक मंदिर , कला संस्कृति देखने को मिलती है यहां आपको शेखावाटी की हवेलियां देखने को मिलेगी जिनमे शेखावाटी की चित्रकला ,मूर्तिकला, ओर स्थापत्य कला के सुंदर चित्रण देखने कोमिलता है यहां हम आपको sikar tourist place in hindi की लिस्ट बता रहे है, जो sikar me ghumne k liye badhiya jagha मानी जाती है।
* हर्षनाथ मंदिर
* जीण माता मंदिर,
* सांई मंदिर मुंडवाड़ा,
* खाटूश्यामजी
* गोपीनाथ जी मंदिर,श्रीमाधोपुर
* खंडेला धाम,

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