विदेशी इमारतों को देखने के लिए पैसे क्यों खर्च करने, भारत में ही हैं मिलती जुलती स्मारकें

जय हिन्द साथियों आज हम बात करेंगे ये हैं विदेशी इमारतों को देखने के लिए पैसे क्यों खर्च करने, भारत में ही हैं मिलती जुलती स्मारकें के बारे में इस आर्टिकल की पूर्ण जानकारी नीचे पॉइंट में बताई गई है तो आप इस आर्टिकल की संपूर्ण जानकारी पढ़े:- दुनिया में कई खूबसूरत अजूबे और स्‍मारक हैं। हमारा देश भारत भी किसी से कम नहीं हैं। यहां का इतिहास इतना समृद्ध है कि सभी ऐतिहासिक स्‍थल भारत की जीवंत संस्कृति को दर्शाते हैं। भारत के भू भाग में कोई न कोई ऐतिहासिक स्‍थल, प्राचीन मंदिर, भव्‍य महल, मस्जिद और किले देखने को मिलते हैं। इन ऐतिहासिक स्‍थलों के निर्माण के पीछे वीरता और शौर्य जैसे कारण मुख्‍य रहे हैं। आर्किटेक्‍ट ने बड़े कलाकारों से प्रेरणा लेकर अपनी उत्‍कृष्‍ट कृतियों के रूप में स्‍मारकों का निर्माण किया और ये स्मारक दुनियाभर में मशहूर हो गए। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि भारत में कई ऐसी स्मारक और इमारतें हैं, जो विदेशी स्‍मारकाें के जैसे ही दिखती है। इन्‍हें देखकर आप पहचान नहीं पाएंगे कि ये वास्‍तव में हमारे देश की स्‍मारक हैं या फिर विदेशी। भारत की इन 6 स्‍मारकों के बारे में, जो विदेशी स्‍मारकों से काफी मिलती-जुलती हैं।

इंडिया गेट (दिल्ली) – आर्क डी ट्रायम्फ (फ्रांस)

  • दिल्‍ली में इंडिया गेट बहुत मशहूर है। इसलिए छोटे-छोटे बच्‍चे भी इंडिया गेट के बारे में जानते हैं।
  • सऩ 1921 में इंडिया गेट को प्रथम विश्‍व युद्ध में लडते हुए शहीद हुए भारतीय सैनिकों के सम्‍मान में बनाया गया था।
  • आपको जानकर हैरत होगी कि इंडिया गेट जैसी संरचना पेरिस के आर्क डी ट्रायम्फ जैसी है, जिसे 1806-36 के बीच बनाया गया था।
  • द आर्क डी ट्रायम्फ उन लोगों के सम्‍मान में बनाया गया था, जो फ्रांसीसी क्रांतिकारी और नेपोलियन युद्धों में फ्रांस के लिए लड़े और मारे गए।
  • इसकी आंतरिक और बाहरी सतहाें पर सभी फ्रांसीसी और जनरलों के नाम खुदे हुए हैं। जबकि इंडिया गेट के मेहराब पर शहीद हुए 13 हजार से ज्‍यादा ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों के नाम खुदे हुए हैं।
  • आर्क डी ट्रायम्फ फ्रांसीसी राष्ट्रीय पहचान का एक प्रतिष्ठित प्रतीक है और इसे बनने में 30 साल लगे।
  • जबकि इंडिया गेट भारत की पहचान है।

लोटस टैंपल (दिल्ली) – ओपेरा नाइटहाउस (सिडनी)

  • दिल्‍ली के लोटस टैंपल जितना खूबसूरत शायद ही कुछ हो।
  • यह टैंपल दूर से एक खिले हुए कमल की तरह दिखता है।
  • असल में यह टेम्पल बहाई धर्म के लिए लोगों का पूजा घर है, बावजूद इसके यहां सभी धर्म के लोग आ जा सकते हैं।
  • लेकिन क्‍या आपने कभी गौर किया है कि यह लोटस टैंपल सिडनी में स्थित ओपेरा हाउस जैसा दिखता है।
  • ओपेरा हाउस एक आर्ट सेंटर है, जो 20वीं शताब्दी के मशहूर स्‍थलों में से एक है।

जामा मस्जिद (दिल्ली) – बादशाही मस्जिद (पाकिस्तान)

  • दिल्ली में स्थित जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी और सबसे खूबसूरत मस्जिदों में से एक है। मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा निर्मित, जामा मस्जिद पाकिस्तान की बादशाही मस्जिद से काफी हद तक मिलती-जुलती है।
  • इस मस्जिद को 1673 ई. में मुगल बादशाह औरंगज़ेब ने बनवाया था।
  • यह मस्जिद मुगल काल की सौंदर्य और भव्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
  • दिलचस्‍प बात है कि पाकिस्तान की इस दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद में एक साथ 55,000 लोग नमाज अदा कर सकते हैं।
  • जबकि जामा मस्जिद का निर्माण 1650 में शाहजहां ने शुरु करवाया था।
  • इसे बनने में 6 साल का समय और 10 लाख रुपए लगे थे।
  • बादशाही मस्जिद का पूरा नाम ‘मस्जिद अबुल जफर मुह-उद-दीन मोहम्मद आलमगीर बादशाह गाज़ी’ है।

कुतुब मीनार (दिल्ली) और मीनार ए (पाकिस्‍तान)

  • कुतुब मीनार के बारे में हम बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं।
  • लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि पाकिस्‍तान में भी एक ऐसी इमारत हैं, जो हूबहू कुतुब मीनार जैसी दिखती है। इसे मीनार- ए – पाकिस्तान कहा जाता है।
  • कुतुब मीनार के विपरीत, मीनार-ए-पाकिस्तान 1960 के दशक में बनाया गया था।
  • दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है जिसे 1192 में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग करके बनाया गया था।
  • यह अद्भुत स्मारक दिल्ली सल्तनत के पहले शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक द्वारा बनाई गई थी।

कुंभलगढ़ किले की दीवार (राजस्थान) – ग्रेट वॉल ऑफ चाइना (चीन)

  • ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के बारे में कौन नहीं जानता।
  • ये दुनिया में ऐसी संरचना है, जिसे दुनिया के 7 अजूबों में शामिल किया गया है।
  • दीवार हजार किलोमीटर लंबी है।
  • हुबहू तो नहीं, लेकिन भारत में ग्रेट वॉल ऑफ चीन की जैसी कुंभलगढ़ किले की दीवार है, जिसे किले की रक्षा करने वाली दीवार कहा जाता है।
  • यह दीवार पिछले कई सालों से किले की संरक्षक रही है।
  • लंबाई में यह ग्रेट वॉल ऑफ चाइना से कम है।
  • यह केवल 36 किमी के दायरे को कवर करती है , लेकिन इसकी विशालता चीन की दीवार से काफी मिलती-जुलती है।

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Conclusion:- मित्रों आज के इस आर्टिकल में विदेशी इमारतों को देखने के लिए पैसे क्यों खर्च करने, भारत में ही हैं मिलती जुलती स्मारकें के बारे में कभी विस्तार से बताया है। तो हमें ऐसा लग रहा है की हमारे द्वारा दी गये जानकारी आप को अच्छी लगी होगी तो इस आर्टिकल के बारे में आपकी कोई भी राय है, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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