चालुक्य वंश

– पुलकेशिन प्रथम चालुक्य वंश का प्रथम वास्तविक शासक था

– चालुक्यों की यह शाखा मुख्य शाखा थी

– इसमें से परमेश्वर का सर्वप्रथम उपयोग हर्षवर्धन पर पुलकेशिन् द्वितीय की विजय के बाद हुआ महाराजाधिराज तथा भट्टारक सर्वप्रथम विक्रमादित्य प्रथम के समय प्रयुक्त हुए

– राजवंश के योग्य व्यक्तियों को राज्य में अधिकार के पदों पर नियुक्त किया जाता था

– राज्य में रानियों का महतव भी नगण्य नहीं होता था

– विजित प्रदेश के शासकों को विजेता की अधीनता स्वीकार कर लेने पर शासन पर अधिकार फिर से प्राप्त हो जाता था

चालुक्यों को सेना संगठित और शाक्तिशाली थी इसका उल्लेख युवानच्वां ने किया है

इसका समर्थन चालुक्यों की विजयों से, विशेष रूप से हर्ष पर सिद्ध होता है

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