राव रणमल कौन थे

जब राणा कुम्भा को रणमल राठौड़ की नीतियों का पता चला तब कुम्भा ने मांडू से कुुंवर चूड़ा को बुला लिया

इस समय रणमल मारवाड़ में चले गयें क्योंकि रणमल ने राघवदेव कुंवर चूड़ा के भाई का वध कर दिया था

इस प्रकार रणमल का दमन करना आवश्यक हो गया

कुंवर चूड़ा नेे मेवाड़ के कुछ वफादार सरदारों की सहायता से मारवाड़ में जाकर रणमल 1438 ई. में मेेेहानी नामक स्थान पर वध कर दिया था

इसमें रणमल की प्रेयसी भारमली का महत्वपूर्ण योगदान रहा

इसके द्वारा ही मेवाड़ में यह सूचना पहुँचाई गई कि रणमल मेवाड़ से मारवाड़ आ पहुँचे हैै

जब रणमल की हत्या हुई तब उनके पुत्र राव जोधा मेवाड़ में ही थे

– मेवाड़ का शासन कार्य भी इनकी सहमति से चलता था अतः मेवाड़ के कुछ सरदार इनसे अप्रसन थे

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