अकबर कौन थे

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अकबर का इतिहास :
अकबर का पूरा नाम बदरुद्दीन मुहम्मद अकबर था उसका जन्म 15 अक्तूबर 1542 को अमरकोट में हुआ था भारत में उसका शासन 1556 से 1605 तक रहा वह एक महान मुगल शासक रहा है अपने साम्राज्य की एकता को बनाए रखने के लिए अकबर ने कई नई नीतियां बनाई भारतीय इतिहास में अकबर का नाम काफी प्रसिद्ध है उसने अपने शासनकाल में सभी धर्माें का सम्मान किया इस लेख में हम आपको अकबर से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

माता-पिता से बिछुड़ना :
हुमायूं का बचपन काफी कष्टमय रहा हुमायूं पने खोये हुए राज्य को फिर से प्राप्त करने के लिए संघर्षरत था हुमायूं को खबर मिली कि अस्करी हमला करके उसको पकड़ना चाहता है हुमायूं, हमीदा बानू को अपने पीछे घोड़े पर बिठाकर पहाड़ों की ओर भागा उसके जाते ही अस्करी दो हजार घुड़सवारों के साथ वहां पहुंच गया उस समय अकबर एक साल का था, जिसे हुंमायूं ले जाने में असमर्थ हुआ।

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यह मोहम्मद जलाल्लुद्दीन अकबर के नाम से प्रसिद्धी पाने वाले मुग़ल शासक थे इन्हें इतिहास में सबसे सफल मुग़ल शासक के रूप में जाना जाता हैं यह एक ऐसा राजा बना जिसे दोनों सम्प्रदायों हिन्दू एवम मुस्लिम ने प्यार से स्वीकार किया इसलिए इन्हें जिल –ए-लाही के नाम से नवाजा गया अकबर के शासन से ही हिन्दू मुस्लिम संस्कृति में संगम हुआ जो कि उस वक्त की नक्काशी से साफ़ जाहिर होता हैं मंदिरों और मज्जितों में समागन हुआ दोनों को समान सम्मान का दर्जा दिया गया जब भी हम इतिहास के इस रूप को देखते हैं तब यही एक सवाल उठता हैं कि ऐसा क्यूँ ? क्यूँ अकबर जैसा शक्तिशाली शासक हिन्दू संस्कृति को भी प्रेम करता था तब इतिहास के पन्नो से ही आवाज आती हैं उस प्रेम कथा की जिसे हम जोधा अकबर कहते हैं |

अकबर के बारे में जानने योग्य तथ्य और जानकारी :
पूरा नाम – अबुल-फतह जलाल-उद्दीन मोहम्मद अकबर
किस रूप में जाना जाता है – अकबर महान
शासनकाल – 11 फरवरी 1556 से 27 अक्टूबर 1605
जन्म – 14 अक्टूबर 1542 (अमरकोट सिंध)
मृत्यु – 27 अक्टूबर 1605 (फतेहपुर सीकरी, आगरा)
दफन – सिकंदरा, आगरा
धर्म – इस्लाम, दीन-ए इलाही
राजवंश – मुगल राजवंश
राज्याभिषेक – 14 फरवरी 1556
पूर्वज – हुमायूँ
उत्तराधिकारी – जहाँगीर
राज्य संरक्षक – बैरम खान (1556-1561)
पत्नी – रूकैया सुल्तान बेगम
पत्नियाँ – पत्नी हीर कुँवारी, हीरा कुँवारी, हरका बाई, जोधा बाई, सलीमा सुल्तान बेगम
पिता – हुमायूँ
माँ – हमीदा बानो बेगम
दादा – बाबर
दादी – महम बेगम
बच्चे – जहाँगीर, दानियाल, सुल्तान मुराद मिर्जा, हवर्ष, हुसैन
विवाह – नबंवर 1551 में अकबर ने काबुल में अपनी चचेरी बहन, रुकैया सुल्तान बेगम से शादी की। रुकैया अकबर की मुख्य पत्नी थीं।
युवा सम्राट – हुमायूँ की मृत्यु के बाद, 13 वर्षीय अकबर को बैरम खान द्वारा पंजाब के कलानौर में ताज पहनाया गया था। जब तक अकबर स्वतंत्र रूप से शासन करने में सक्षम नहीं हो गए, तब तक बैरम खान ने राज्य के मामलों में फैसला किया।
दिल्ली को पुनः प्राप्त करना – 5 नवंबर 1556 को, हेमू और सूर की सेना अकबर की सेना से हार गई थी, जिसने पानीपत के द्वतीय युद्ध में बैरम खान का नेतृत्व किया था।
बैरम खान को पद से हटाना – अकबर ने अपनी धाय माँ, माहम अनगा की सलाह पर उनके संबंधी बैरम खान को वर्ष 1560 में पद से हटा दिया था।
मध्य भारत में विस्तार – वर्ष 1564 में, मुगल सेनाओं द्वारा गोंडवाना साम्राज्य पर विजय प्राप्त की थी।
हल्दीघाटी का युद्ध – वर्ष 1576 में मुगलों ने हल्दीघाटी के युद्ध में उदय सिंह के पुत्र और उत्तराधिकारी प्रताप सिंह को हराया।
बलूचिस्तान पर विजय – मुगल साम्राज्य ने बलूचिस्तान पर भी विजय प्राप्त की थी।
सफाविद और कंधार – वर्ष 1558 में, तहमासप I, सफ़ाविद सम्राट, कंधार को पछाड़ दिया और इस मुगल शासक को परास्त कर दिया।
कर निर्धारण – अकबर ने कर के वार्षिक मूल्यांकन को अधिकार के रूप में अपनाया, लेकिन यह वर्ष 1580 में विफल हो गया। इसके बाद उन्होंने दहसला नामक व्यवस्था को शुरू किया । अकबर शायद अपने राजस्व अधिकारियों के लिए एक लक्ष्य-आधारित पारिश्रमिक प्रणाली का प्रयोजन करने वाले पहले सम्राट थे। इसमें राजस्व अधिकारियों केवल तीन-चौथाई वेतन प्राप्त करना होता था और शेष राशि तब ही देनी होती थी, जब राजस्व लक्ष्य निर्धारित होते थे।
राजधानी वर्ष 1599 में आगरा को राज्य की राजधानी बनाया गया था।
सिक्का – अकबर द्वारा चलाए गए सिक्के गोल और चौकोर थे और उनके किनारे पर बिंदु, फूलों का रूपांकन और चौपतिया छिद्र बने थे। उन्हें ‘मेहराब’ आकार में भी डिजाइन किया गया था।
विद्वानों के संरक्षक – अकबर ने मुस्लिम विद्वानों जैसे ताहिर मुहम्मद थतवी और मीर अहमद नसरलाह थतवी को संरक्षण दिया।
दीन-ए-इलाही – अकबर ने 1582 ईस्वी में एक समरूप धर्म दीन-ए इलाही का प्रतिपादन किया, लेकिन समय से पहले ही उनका यह विचार विफल हो गया।
हिंदुओं के साथ संबंध – अकबर ने घोषित किया कि धर्म परिवर्तन न करने वाले हिंदू लोगों को कोई मौत की सजा नहीं दी जाएगी। अकबर ने दिवाली का त्यौहार मनाया। ब्राह्मणों के आशीर्वाद के माध्यम से उनको कलाई में कलावा पहनने की इजाजत दी गई थी। गाय के माँस का त्याग करने के लिए कहा गया था और उन्होंने कुछ दिनों के लिए माँस की बिक्री पर रोक लगा दी थी।
साहित्य में उल्लेख – अबुल फजल द्वारा आइने-ए-अकबरी और अकबरनामा तथा बदायुनी द्वारा शेखजादा रशीदी और शेख अहमद सरहिंदी पुस्तकें लिखी गई। अकबरनामा में फारसी में अकबर की जीवनी है
मृत्यु 27 अक्टूबर 1605 में उनकी मृत्यु हो गई। उनका दफन कक्ष सिकंदरा, आगरा में एक मकबरे के रूप में बना है।
फिल्में और टेलीविजन – जोधा अकबर, मुगल-ए-आजम, अकबर-बीरबल (टीवी धारावाहिक), अकबर महान (टीवी धारावाहिक), जोधा अकबर (टीवी धारावाहिक)
उपन्यास सलमान रुश्दी द्वारा (2008) एन्चेंट्रेस ऑफ फ्लोरेंस
वीडियो गेम – सिविलाइजेशन 4: बियॉन्ड द स्वॉर्ड, एज ऑफ एम्पायर III: द एशियन डायनेस्टी

सम्राट अकबर का प्रारंभिक जीवन और बचपन :
अकबर के पिता नसीरुद्दीन हुमायु मुगल समराज के दूसरे सम्राट थे 1540 में उनके पिता शेरशाह सूरी से कन्नौज के युद्ध में अपना राजपाठ के साथ-साथ सब कुछ हार चुके थे. जब अकबर के पिता के पास कुछ नहीं था तो उसी समय उनकी पत्नी हमीदा बानो बेगम गर्भवती हुई थी उस समय हुमायु की स्थिति इतनी खराब थी कि उसके पास रहने के लिए घर बार नहीं था हुमायु की ऐसी स्थिति देख उमरकोट किले के हिंदू शासक राणा प्रसाद ने उनको शरण दी थी. हुमायु लगातार मुगल सत्ता फिर से स्थापित करने के लिए प्रयत्न कर रहा था जिस समय जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का जन्म हुआ था उस समय उनके पिताजी को पुत्र जन्म की प्रसन्नता में मित्रों को भेंट देने के लिए कुछ भी नहीं था , सिर्फ कस्तूरी थैली के उन्होंने कस्तूरी थैले को देकर के ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहां की इस मुस्क की खुशबू की भांति अकबर की कृति भी चारों ओर फैले विषम परिस्थितियां होने की वजह से हुमायु ने उसके पैतृक चाचा कामरान मिर्जा और अक्षरी मिर्जा के घर पर छोड़ कर चले गए. बड़े होकर अकबर ने वहां पर शिकार करना, हथियारों का उपयोग करना और युद्ध कौशल सीखना, महान योद्धा बन्ना के सभी चीजों का अध्ययन किया और जो आगे चलकर भारत का सबसे बड़ा सम्राट बना 1555 में हुमायु ने फारसी शासक शाह तहमास प्रथम के सैन्य समर्थन के बल पर कामरान की उसकी धृष्टता तथा विश्वासघात का बदला लेने के लिए उस पर आक्रमण करके दिल्ली को उससे वापस जीत लिया हुमायूं दिल्ली तक सको तो पुनः हासिल कर लिया परंतु उस पर ज्यादा समय तक शासन नहीं कर पाया. जनवरी 1956 में एक दुर्घटना में हुमायु की मृत्यु हो गई परंतु हुमायु के भरोसेमंद और अकबर के संरक्षक बैरम खान ने अकबर के युवा होने तक शासनकाल को संभाले रखा बैरम खां के नेतृत्व में 14 फरवरी 1956 को कलानौर, पंजाब में सम्राट अकबर को हुमायूं का उत्तराधिकारी बना कर सम्राट घोषित कर दिया नवंबर 1591 में अपने मामा हिंडाल मिर्जा की बेटी रुकैया सुल्तान बेगम से अकबर ने शादी की रुकैया के सिंहासन चढ़ने के बाद अकबर की मुख्य पत्नी के रूप में वह सामने आई |

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