महाराजा अजीत सिंह कौन थे

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महाराजा अजीत सिंह कौन थे

अजीत सिंह मारवाड़ के राजा जसवंत सिंह का पुत्र था उसका जन्म 1679 ई. में लाहौर में हुआ उसके जन्म से पहले ही उसके पिता की मृत्यु हो चुकी थी कुछ समय पश्चात् अजीत सिंह को दिल्ली लाया गया जहाँ पर मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब उसे मुस्लिम बना लेना चाहता था राठौर सरदार दुर्गादास बड़े साहस के साथ अजीत सिंह को दिल्ली से निकाल कर मारवाड़ ले गया।

मारवाड़ का अधिकार हासिल किया :-
मारवाड़ पर अपने शासन की स्थापना को मजबूत करने के बाद अजीत सिंह उतनी तेजी से साहसी हो गये जैसे मुगल सम्राट बहादुर शाह दक्षिण की ओर चल रहे थे।उन्होंने अमरे के साथ सवाई राजा जयसिंह द्वितीय का विवाह किया और मुगल वंश की भूमि पर कब्जा कर लिया मुगलों के शिविरों पर हमला करने लगे और इसके अलावा कई शहरों और किलों पर कब्जा कर लिया गया फिर भी मुगलों के लिए सबसे बड़ा प्रहार सांभर पर हुआ जो नमक बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान था।
सन् 1709 में अजित सिंह ने अजमेर पर विजय प्राप्त करने और मुस्लिम मस्जिदों और मस्जिदों को नष्ट करने की योजना बनाई लेकिन जयसिंह द्वितीय को भय था कि मुसलमान मंदिरों के विनाश से दकन से वापस आने के बाद मुगल सम्राट का रोष हो जाएगा।बहरहाल, जयसिंह ने जयसिंह की अनदेखी कर दी और अपनी सेना को अजमेर की ओर ले जाया अजीत सिंह ने 19 फरवरी को अजमेर पर घेर लिया शुजखान के नेतृत्व में मुगल सेना ने अजीत सिंह के साथ 45,000 रुपए, दो घोड़ै, हाथी और पुष्कर नामक पावन नगरी की भेंट से मंदिर-मस्जिद को दे दिया अजीत सिंह ने उनकी बात मान ली और राजधानी लौटे।

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जून 1710 में बहादुरशाह ने बहादुरशाह की एक बड़ी फौज लेकर अजमेर पहुंचा और अजीत सिंह को अजमेर भेज दिया विद्रोही अजीत सिंह को अंत में क्षमा कर दिया गया और मुगल सम्राट द्वारा जोधपुर के राजा के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया1712 में अजीत सिंह को गुजरात के मुगल राज्यपाल के रूप में नियुक्त कर अधिक शक्ति मिली सन् 1713 में नये मुगल सम्राट फर्रुख्शीयार ने ठट्टा का अजीत सिंह का राज्यपाल नियुक्त किया अजीत सिंह गरीब प्रदेश के पास जाने से इंकार कर दिया और फर्रुख्शीयार ने हुसेन अली ब्राह्ह को भेजा और अजीत सिंह को सहायता देने का वचन दिया बल्कि अजीत सिंह ने हुसैन से बातचीत करने का फैसल किया और निकट भविष्य में गुजरात लौटने के वादे से थाटा के गवर्नर का पद स्वीकार किया |

अजीत सिंह की मृत्यु :-
सैयद बन्धुओं ने अजीत सिंह से सहायता माँगी और उसको अजमेर-गुजरात का सूबेदार नियुक्त कर दिया इस प्रकार अजमेर से पश्चिमी समुद्र तट तक का सारा प्रदेश अजीत सिंह के अधीन हो गया उसे हिन्दुओं को संगठित करके मुग़ल सल्तनत का तख़्ता पलट करने का अच्छा अवसर प्राप्त हुआ था किन्तु उसने इस अवसर का कोई भी लाभ नहीं उठाया उसके लड़के भक्तसिंह ने रहस्यमय रीति से उसकी हत्या कर दी।

नोट > महाराजा अजीत सिंह की ऐतिहासिक जानकारी काफी विस्तृत है हमने अपने इस पोस्ट में मुख्य पहलुओं पर ही जानकारी दी है फिर भी कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट गयी है तो हम उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं।

राजस्थान के सम्राट

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