मेवाड़ के महाराणा भगवंत सिंह का जीवन परिचय

मेवाड़ के महाराणा भगवंत सिंह का जीवन परिचय

मेवाड़ के महाराणा भगवंत सिंह का जीवन परिचय – महाराणा लक्ष्यराज सिंह महाराणा प्रताप के पोते, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, Bhagwat Singh of Mewar wife, Bhupal Singh father, Bhagwat Singh of Mewar son, Lakshyaraj Singh Mewar net worth, Vishvaraj Singh, Lakshyaraj Singh Mewar wife,

मेवाड़ के महाराणा भगवंत सिंह का जीवन परिचय

मेवाड़ राजवंश ने भले ही भारतीय संघ में विलय कर दिया था, लेकिन उसके मुखिया पूरी शानशौकत के साथ रहते थे। अरविंद सिंह मेवाड़ यानि श्रीजी जब महज 12 वर्ष के थे उनके पिता भागवत सिंह तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू के निमंत्रण पर लाल किला देखने के लिए आए। इसके पीछे दिलचस्प कहानी ये है कि मेवाड़ के राजाओं ने शपथ ली थी कि जब तक दिल्ली पर विदेशियों का शासन रहेगा वो दिल्ली नहीं जाएंगे। जिस समय मेवाड़ के महाराजा दिल्ली गए उस समय देश को आजादी हासिल हो चुकी थी।

कुछ ऐसा था मेवाड़ राजवंश –
रियासतों का जब भारतीय संघ में विलय हो रहा था उस वक्त राजाओं, रानियों, नवाबों और बेगमों को प्रिवी पर्स दिया जा रहा था। लेकिन मेवाड़ के महाराना भागवत सिंह दूरदृष्टि वाले थे। उन्होंने अपनी संपत्ति के कुछ हिस्सों को प्राइवेट कंपनी के जरिए होटलों में बदल दिया। उनके इस कदम से राजपरिवार को आय का एक स्थाई स्रोत हासिल हुआ। अरविंद सिंह मेवाड़ जब 25 साल के थे उस वक्त प्रिवी पर्स और उपाधियों को इंदिरा गांधी की सरकार ने खत्म कर दिया था। दरअसल इस मुहिम में इंदिरा गांधी ने श्रीजी के पिता से मदद मांगी ताकि राजा-रजवाड़ों के आत्म सम्मान पर किसी तरह की चोट न पहुंचे । भागवत सिंह ने कहा कि प्रिवी पर्स की समाप्ति से राजाओं को आर्थिक कठिनाइयां आएंगी। लेकिन उनके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने एक ट्रस्ट का गठन कर अरविंद सिंह को ट्रस्टी बना दिया।

राणा की छवि अभी भी बरकरार –
देश की आजादी के सत्तर साल और प्रिवी पर्स खत्म होने के 48 साल के बाद श्री जी की छवि आज भी मेवाड़ के लोगों के लिए महाराणा की ही तरह है। 2003 में सिटी पैलेस को प्रत्येक दिन 800 पर्यटक देखने के लिए आते थे। अब ये संख्या बढ़कर 3000 हो गई है। सिटी पैलेस को व्यवसायिक तरीके से चलाने के लिए 2000 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। उदयपुर की करीब 40 फीसद जनता अपनी आजीविका के लिए उदयपुर सिटी पैलेस पर निर्भर है।शंभू निवास पैलेस, शिव निवास पैलेस और फतेह प्रकाश पैलेस बागों के जरिए एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। संगमरमर के फाउंटेन से जब पानी निकल रहा होता है को इसका मतलब ये होता है कि श्री जी महल के अंदर हैं। श्री जी के पास विंटेज कारों का बेड़ा है जिन्हें मेवाड़ मोटर गैराज में रखा गया है। अरविंद सिंह की प्रिय सवारी 1924 में बनी मोरिस ग्रीन है। सभी विंटेज कारों को म्यूजियम के गार्डेन में निकाला जाता है। लेकिन सिटी पैलेस के बाहर कारों को नहीं ले जाया जाता है।

जन्म तथा परिचय राजस्थान के कुम्भलगढ़ में राणा प्रताप का जन्म सिसोदिया राजवंश के महाराणा उदयसिंह एवं माता रानी जीवत कँवर के घर 9 मई, 1540 ई. को हुआ था। रानी जीवत कँवर का नाम कहीं-कहीं जैवन्ताबाई भी उल्लेखित किया गया है। वे पाली के सोनगरा राजपूत अखैराज की पुत्री थीं। प्रताप का बचपन का नाम ‘कीका’ था। मेवाड़ के राणा उदयसिंह द्वितीय की 33 संतानें थीं। उनमें प्रताप सिंह सबसे बड़े थे। स्वाभिमान तथा धार्मिक आचरण उनकी विशेषता थी। प्रताप बचपन से ही ढीठ तथा बहादुर थे। बड़ा होने पर वे एक महापराक्रमी पुरुष बनेंगे, यह सभी जानते थे। सर्वसाधारण शिक्षा लेने से खेलकूद एवं हथियार बनाने की कला सीखने में उनकी रुचि अधिक थी

गोत्र से संबंधित लिस्ट

Leave a Comment