मोटा राजा उदयसिंह कौन थे

अजमेर कब बना था , अजमेर क्यों प्रसिद्ध है , अजमेर के संस्थापक कौन थे, ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भारत कब आये, अजमेर का युद्ध , अजमेर शरीफ का इतिहास , अजमेर जिला कब बना , अजमेर शरीफ का सच , तारागढ़ किला अजमेर, राजस्थान , अजमेर जिले में कितने गांव है , अजमेर जिले के गांव , अजमेर जिले में कितनी तहसील है , मोटा राजा उदयसिंह कौन थे ,

मोटा राजा उदयसिंह कौन थे

मारवाड़ का प्रथम शासक जिसने बादशाही मनसब स्वीकार की अकबर ने इसे 1000 की मनसब तथा राजा की पदवी दी1586 ई. में उसने अपनी पुत्री जगत गोसाई का विवाह सलीम से किया जिसमें खुर्रम हुआ जोधपुर की राजकुमारी होने के कारण इसे जोधाबाई भी पुकारा जाता है उदयसिंह ने बादशाही सेना के साथ मिलकर सिवाणा के शासक रायमलोत कल्ला पर आक्रमण किया और सिवाणा का दूसरा शाका हुआ।

यह भी पढ़े : अजमेर का इतिहास

मोटा राजा उदयसिंह का इतिहास >
राव चन्द्रसेन के बडे़ भ्राता उदयसिंह नागौर दंरबार में अकबर की सेवा कर आ चुके थे अतः इनकी वीरता व सेवा से प्रसन्न हो अकबर ने उन्हें 4 अगस्त, 1583 को जोधपुर का षासक बना दिया राव उदयसिंह जोधपुर के प्रथम षासक थे जिन्होने मुगल अधीनता स्वीकार कर अपनी पूत्री मानीबााई का विवाह षाहजादा सलीम से कर मुगलो से वैवाहिक संबंध स्थापित किये राव उदयसिंह ने अकबर को अनेक युद्धों में विजय दिलवाई और अन्ततः 1595 में लाहौर में इनका स्वर्गवास हुआ मोटा राजा उदयसिंह ने मालदेव के समय प्रारंभ हुई सतत युद्ध की स्थिति को समाप्त कर जोधपुर रियासत को सुख शांति से जीने का अवसर उपलब्ध कराया
राव उदयसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र षूरसिंह जी सन् 1595 में जोधपुर के सिंहासन पर आसीन हुए बादषाह अकबर ने षूरसिह जी की वीरता से प्रसत्र हो 1604 ई. में इन्हेें ‘सवाई राजा‘ की उपाधि से सम्मानित किया षाहजाा खुर्रम के मेवाड़ अभियान में षूरसिंह जी ने उसका पूरा साथ दिया था षूरसिंह जी बड़े प्रतापी व बुद्धिमान राजा थे राव मालदेव के बाद इन्होने की मारवाड़ राज्य की वास्तविक उन्नति की षूरसिंह के बाद उनके पुत्र राव राजसिंह को उपाधि दी एवं इनके घोडो को शाही दाग से मुक्त कर दिया सन् 1638 में आगरे में इनका देहान्त हो गया। वही यमुना किनारे इनकी अन्त्येष्टि की गई।

मोटा राजा उदयसिंह की जीवनी >
राजपूताना भूमि को उसके योद्धा पुत्रों की साहस और बहादुरी के रूप में जाना जाता है उनके खून से रंगी हुई रेगिस्तान की मिट्टी जो इन महान योद्धाओं के लिए जानी जाती है और उनकी महिमा का प्रतीक है मेवाड़ की धरती पर कई महान योद्धाओं ने जन्म लिया है और शिष्टता वीरता और स्वतंत्रता के लिए जाने जाते थे लेकिन हर सिक्के का एक और पहलु होता है और हर युग में कुछ अजीब जरूर देखने को मिला है।
सिवाना के कल्याणदास राठौड़ ने उदयसिंह और जहाँगीर को मारने की धमकी दी क्योंकि उदयसिंह ने अपनी बेटी जगत गोसाई का विवाह जहाँगीर के साथ निर्धारित किया था यह ज्ञान होने के पश्चात् अकबर ने सिवाना पर हमला कर दिया और इसमें कल्याणदास अपने लोगों के साथ वीरगति को प्राप्त हुये और सिवाना की महिलाओं ने जौहर कर लिया।

मोटा राजा उदयसिंह की हत्या >
उदयसिंह प्रथम इन्हें कभी-कभी उदयकरण या उदाह या ऊदा के नाम से भी जाने जाते थे और ये एक मेवाड़ साम्राज्य के महाराणा थे ये महाराणा कुम्भा के पुत्र थे जब राणा कुंभा एकलिंगजी की प्रार्थना कर रहे थे उदय सिंह प्रथम ने उनकी हत्या कर दी और खुद को शासक घोषित कर दिया था वह एक क्रूर शासक थे 1473 में उनकी मौत बिजली गिरने से हुई |

राजस्थान के सम्राट

Leave a Comment