राव रणमल कौन थे

राव रणमल का इतिहास , राव रणमल के पुत्र , राव जोधा का इतिहास ,राव रणमल के वंशज , राव वंश , राव सीहा का इतिहास , राव रणमल के कितने पुत्र थे , राठौड राजपूत वंश की उत्पत्ति , जोधपुर का राठौड़ वंश , राव रणमल मारवाड़ के शासक , राव चूड़ा राठौड़ का बेटा, मेवाड़ की रानी हंसाबाई का भाई था , णमल राठौड की हत्या हो जाने के कारण राठौड -सिसोदिया , राव रणमल कौन थे ,

राव रणमल कौन थे

रणमल मारवाड़ के राठौड़ वंश के शासक राव चूड़ा राठौड़ का बेटा था तथा मेवाड़ की रानी हंसाबाई का भाई था इन्होंने मेवाड़ की प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करना प्रारंभ कर दिया क्योंकि रणमल मेवाड़ के राणा लाखा की विषम परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहते थे रणमल के कहने पर ही राव चूड़ा ने अपनी पुत्री का विवाह इस शर्त पर किया कि हंसाबाई से उत्पन्न पुत्र ही मेवाड़ के उत्तराधिकारी होंगे |

राणा लाखा की मृत्यु के बाद हंसाबाई रणमल को मारवाड़ से मोकल का संरक्षक बनने के लिए बुलाती है रणमल राणा मोकल के संरक्षक बने राणा कुम्भा ने अपने पिता राणा मोकल की हत्या का बदला रणमल राठौड़ की सहायता से लिया |

यह भी पढ़े : जैसलमेर की वेश-भूष

जब राणा कुम्भा को रणमल राठौड़ की नीतियों का पता चला तब कुम्भा ने मांडू से कुुंवर चूड़ा को बुला लिया इस समय रणमल मारवाड़ में चले गयें क्योंकि रणमल ने राघवदेव कुंवर चूड़ा के भाई का वध कर दिया था इस प्रकार रणमल का दमन करना आवश्यक हो गया कुंवर चूड़ा नेे मेवाड़ के कुछ वफादार सरदारों की सहायता से मारवाड़ में जाकर रणमल 1438 ई. में मेेेहानी नामक स्थान पर वध कर दिया था इसमें रणमल की प्रेयसी भारमली का महत्वपूर्ण योगदान रहा इसके द्वारा ही मेवाड़ में यह सूचना पहुँचाई गई कि रणमल मेवाड़ से मारवाड़ आ पहुँचे हैै जब रणमल की हत्या हुई तब उनके पुत्र राव जोधा मेवाड़ में ही थे लेकिन हत्या के उपरांत राव जोधा को मारवाड़ लाया गया |

रणमल का अंत समय >
मेवाड़ का शासन कार्य भी इनकी सहमति से चलता था अतः मेवाड़ के कुछ सरदार इनसे अप्रसन थे और इन्होने मेवाड़ नरेश महाराणा कुम्भा व उनकी माता सोभाग्य देवी को राव रणमल जी के विरुध बहका दिया |वि॰सं॰ 1495(1438 AD) में एक साजिश के तहत गहरी निंद में सोये राव रणमल को मार डाला गया व रावत चुडा लाखावत सिसोदिया के नेत्रत्व में मेवाड़ की सेना मंडोर पर आक्रमण कर मारवाड़ राज्य पर अधिकार जमा लिया |अपने पिता के निधन के साथ ही राव जोधा का पेत्रक राज्य भी हाथ से निकल गया, लेकिन राव जोधा ने यह कभी नहीं भुला की धरती वीरों की वधु होती है और युद्ध क्षत्रिय का व्यवसाय |

राजस्थान के सम्राट 

Leave a Comment