उदयपुर का इतिहास

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उदयपुर का इतिहास

वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं श्री गौरीशंकर ओझा की पुस्तक “मेवाड़ राज्य का इतिहास” एक ऐसी पुस्तक है जिसे मेवाड़ के सभी शासकों के नाम एवं क्रम के लिए सर्वाधिक प्रमाणिक माना जाता है |

उदयपुर का इतिहास >
इस शहर को सन् 1559 में शिशोदिया राजवंश के वंशज महाराणा उदयसिंह ने स्थापित किया था उदयपुर शहर शिशोदिया राजवंश द्वारा ‌शासित मेवाड़ की राजधानी रही है।

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उदयपुर की स्थापना >
महाराणा उदयसिंह ने सन् 1559 ई. में उदयपुर नगर की स्थापना की लगातार मुग़लों के आक्रमणों से सुरक्षित स्थान पर राजधानी स्थानान्तरित किये जाने की योजना से इस नगर की स्थापना हुई उदयपुर शहर राजस्थान प्रान्त का एक नगर है यहाँ का क़िला अन्य इतिहास को समेटे हुये है इसके संस्थापक बप्पा रावल थे जो कि सिसोदिया राजवंश के थे आठवीं शताब्दी में सिसोदिया राजपूतों ने उदयपुर (मेवाड़) रियासत की स्थापना की थी।

उदयपुर के प्रमुख त्यौहार >
मेवाड़ उत्सव – मार्च अप्रैल के महीने में यह त्यौहार बसंत ऋतु के स्वागत के लिए मनाया जाता है यह त्यौहार विशेषतौर पर महिलाओं का होता है जब वे रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर उत्सुकता से इस उत्सव में भाग लेती हैं।

शिल्पग्राम मेला – उदयपुर शहर से करीब 3 किमी दूर है शिल्पग्राम गाँव, जहाँ प्रत्येक वर्ष नवंबर या दिसम्बर महीने में इस उत्सव का आयोजन किया जाता है शिल्पग्राम गाँव को शिल्पकारियों- कारीगरों का स्थान कहा जाता है जहाँ आकर पर्यटक कई हस्तनिर्मित वस्तुएं खरीद सकते हैं।

उदयपुर की जनसंख्या >
2001 की गणना के अनुसार उदयपुर की जनसंख्या 3,89,317 है, उदयपुर ज़िले की कुल जनसंख्या 26,32,210 है।

उदयपुर के प्रमुख शासक >
> रावल खुमान – 753 ई०
> मत्तट – 773 – 793 ई०
> भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
> रावल सिंह – 813 – 828 ई०
> खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
> महायक – 853 – 878 ई०
> खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
> भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
> अल्लट – 951 – 971 ई०
> नरवाहन – 971 – 973 ई०
> शालिवाहन – 973 – 977 ई०
> शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
> शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
> नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
> कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
> योगराज – 1051 – 1068 ई०
> वैरठ – 1068 – 1088 ई०
> हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
> वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
> विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
> अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
> चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
> विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
> रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
> क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
> सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०
> कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
> मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
> पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
> जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
> तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
> समर सिंह – 1273 – 1301 ई०

उदयपुर की यात्रा सुविधाएं >
गर्मियों में यहाँ अत्यधिक गर्मी होती है इस समय यात्रा की योजना न बनायें सिटी पैलेस में लाइट और साउंड शो देख सकते हैं बाज़ार में कुछ खरीदने से पहले मोलभाव जरूर कर लें बिना मीटर के वाहन में बैठने से पहले किराया तय कर लें

उदयपुर के यातायात और परिवहन >
हवाई मार्ग – उदयपुर का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप हवाई अड्डा है यह हवाई अड्डा डबौक में है जयपुर, जोधपुर, दिल्ली तथा मुंबई से यहाँ नियमित उड़ाने उपलब्‍ध हैं।

रेल मार्ग – उदयपुर का रेलवे स्‍टेशन देश के अन्‍य शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग – उदयपुर शहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 8 पर स्थित है यह सड़क मार्ग जोधपुर से 276 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, जयपुर से 396 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम तथा दिल्ली से 652 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

उदयपुर घूमने का समय >
उदयपुर की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है।

नोट > उदयपुर का इतिहास की ऐतिहासिक जानकारी काफी विस्तृत है हमने अपने इस पोस्ट में मुख्य पहलुओं पर ही जानकारी दी है फिर भी कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट गयी है तो हम उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं।

उदयपुर की पूरी जानकारी 

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