चौहान वंश की वंशावली

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चौहान वंश चौहान चार अग्निकुला कुलों में से एक है, जो असुरों या राक्षसों के खिलाफ लड़ने के लिए माउंट आबू में एक बलि के अग्निकुंड से अपनी उत्पत्ति प्राप्त करते हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार अग्निकुला वंश मूल रूप से गुर्जर थे और चौहान गुर्जरों के प्रमुख कबीले थे।चौहान वंश राजपूतों के प्रसिद्ध वशों में से एक है। ‘चव्हाण’ या ‘चौहान’ उत्तर भारत की आर्य जाति का एक वंश है। चौहान गोत्र राजपूतों में आता है। कई विद्वानों का कहना है कि चौहान सांभर झील, पुष्कर, आमेर और वर्तमान जयपुर (राजस्थान) में होते थे, जो अब सारे उत्तर भारत में फैले चुके हैं। इसके अतिरिक्त मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) एवं अलवर ज़िले में भी इनकी अच्छी-ख़ासी संख्या है।

चौहान वंश के संस्थापक 

चौहान वंश का संस्थापक वासुदेव को माना जाता है। इनकी प्रारंभिक राजधानी अहच्छत्रपुर थी। बाद में अजयराज के समय अजमेर इनकी राजधानी बनी। इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक विग्रहराज चतुर्थ था। इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज तृतीय था। ये शाकंभरी नामक स्थानीय देवी के उपासक थे इसलिए ये शाकंभरी के चौहान भी कहलाये। चौहानों का उदय जांगल देश में हुआ था जिसे सपादलक्ष के नाम से भी जाना जाता था। इस वंश के प्रारंभिक शासक कन्नौज के प्रतिहार शासकों के सामंत थे।

चौहान वंश प्रसिद्ध शासक 

> अजयदेव चौहान
> अर्णोराज (लगभग 1133 से 1153 ई.)
> विग्रहराज चतुर्थ बीसलदेव (लगभग 1153 से 1163 ई.)
> पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.)

चौहान वंश का इतिहास 

चौहान या चव्हाण भारत की एक प्रसिद्ध जाति है जो राजपूतों में आता है। विद्वानों का कहना है कि चौहान मूल से राजपूत थे तथा १० वी शताब्दी तक गुर्जर/गुर्जरात्रा प्रदेष (गुजरात) राजपूत राजवंश प्रतिहारो के अधीन थे। साम्भर झील और पुष्कर, आमेर और वर्तमान जयपुर, राजस्थान में भी होते थे, जो अब सारे उत्तर भारत में फैले हुए हैं। इसके अलावा मैनपुरी उत्तर प्रदेश एवं नीमराना, राजस्थान के अलवर जिले में भी पाये जाते हैं। जौरवाल गोत्र के मीणा भी इनके वंशज माने जाते हैं जिनहोने तराईन के युध में पृथ्वीराज का बहुत साथ दिया था। आज में उन्ही के वंशजों में खिंवाडा़ के चौहान है। जो आज के समय मे पाली निवास करते हैं।

राजस्थान के चौहान वंश 

> सांभर के चौहान
> रणथम्भौर के चौहान
> जालौर के चौहान
> चौहान वंशीय हाड़ा राजपूत

राजस्थान के चौहान वंश के दोहा 

> चौहान को वंश उजागर है,जिन जन्म लियो धरि के भुज चारी,
> बौद्ध मतों को विनास कियो और विप्रन को दिये वेद सुचारी॥ चौहान की कई पीढियों के बाद अजय पाल जी महाराज पैदा हुये
> जिन्होने आबू पर्वत छोड कर अजमेर शहर बसाया
> अजमेर मे पृथ्वी तल से 15 मील ऊंचा तारागढ किला बनाया जिसकी वर्तमान में 10 मील > > ऊंचाई है,महाराज अजयपाल जी चक्रवर्ती सम्राट हुये
> इसी में कई वंश बाद माणिकदेवजू हुये,जिन्होने सांभर झील बनवाई थी।
> सांभर बिन अलोना खाय,माटी बिके यह भेद कहाय”
> इनकी बहुत पीढियों के बाद माणिकदेवजू उर्फ़ लाखनदेवजू हुये
> इनके चौबीस पुत्र हुये और इन्ही नामो से 24 शाखायें चलीं

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